Friday, June 5, 2015

आओ नमन करें।

    आओ नमन करें।
    भारत मां पर कुर्बानी का इतिहास भरा है
    जो मां भारती के वीरों से टकराया, वो जीते जी मरा है
    वीर सावरकर जैसे बलिदानी से काल-कोठरी भी सजी है
    फांसी के फंदे पर झूले ऐसे वीरों की अनेक गाथाएं हमने सुनी हैं...
    आओ मिलकर ऐसी धरती मां को नमन करें।

    रानी झांसी, दुर्गा भाभी जैसी वीरांगनां भी यहां पली थी
    मंगल पाण्डेय की गोली से पहली क्रांति की लौ जगी थी
    धरती कांपी, आसमान कांपा भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान से
    अंग्रेजों की सत्ता थर्राई थी, ऐसे वीरों के नामों से
    आओ मिलकर ऐसी धरती मां को नमन करें।
    महाराणा प्रताप, टीपू सुल्तान की तलवार ने ललकारा था
    छक्के छूटे अंग्रेजों के ऐसा जज्बा दिल में बसाया था
    श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान भी हम न भूलें
    आज तिलक, गोखले, नेताजी की वीरगाथा को प्रणाम कर लें
    आओ मिलकर ऐसी धरती मां को नमन करें।
    जलियांवाला बाग याद दिलाता है एक विदारक कहानी को
    दन-दन गोलियां खाते मां भारती के शूरवीर-सेनानी को
    गोलियों से भूने गए सैकड़ों निहत्थे बच्चे-बूढ़े-जवानों को
    मरने वाले याद कर रहे थे इंकलाब-जयहिंद की शान को
    आओ मिलकर ऐसी धरती मां को नमन करें।
    फिर गांधी की शांति-अहिंसा की दुधारी तलवार से हुए प्रहार
    अंग्रेजों की ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति की हुई थी हार
    धन्य हुई धरती उधम सिंह जैसी त्यागी-बलिदानी से
    क्रांति का आगाज हुआ था ऐसे शूरवीर-मर्दानों से
    आओ मिलकर ऐसी धरती मां को नमन करें।
    आओ मिलकर हम भी मां-भारती के वीर-सपूत कहलाएं
    आज ऐसी लौ जगाने की सबकी बारी आई है
    जो शहीद हुए हैं जरा याद करें उनकी कुर्बानी
    संभाल कर रखें हम शहीदों की ये अमर निषानी
    आओ मिलकर ऐसी धरती मां को नमन करें।
    वंदन है, अभिनंदन है, आप मेरे सिर का चंदन हैं। जयहिंद।

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